शुक्रवार, 25 मार्च 2011

जज़्बात: ......मिलती है मगर जाने क्यों ओझल सी जिंदगी |

जज़्बात: ......मिलती है मगर जाने क्यों ओझल सी जिंदगी : "हर कोई चाहता है मुकम्मल सी जिंदगी, मिलती है मगर जाने क्यों ओझल सी जिंदगी ****** किसके के लिए ..."

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें